2019-10-20
धुले 20 अक्टुंबर। पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य रत्न पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति अवंति तीर्थोेद्धारक आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने सूरि मंत्र की चौथी एवं पांचवीं पीठिका की आराधना ता. 20 अक्टूबर को संपन्न की।
इस उपलक्ष्य में ता. 20 अक्टूबर को महामांगलिक का विशिष्ट आयोजन किया गया।
ता. 26 सितम्बर 2019 को पूज्यश्री ने चौथी मंत्र पीठिका में प्रवेश किया था। आठ दिवसीय चौथी पीठिका की पूर्णाहुति पर ता. 4 अक्टूबर को महापूजन का आयोजन किया गया। उसी दिन पूज्यश्री ने पांचवीं मंत्राधिराज पीठिका में प्रवेश किया। चौथी पीठिका में पूज्यश्री ने गणिपिट्टक यक्षराज की एवं पांचवीं पीठिका में गुरु गौतमस्वामी की आराधना संपन्न की। ता. 20 अक्टूबर को सूरिमंत्र महापूजन का विधान किया गया।
पीठिका की पूर्णाहुति पर सकल श्री संघ के साथ पूज्यश्री प्रवचन सभा में पधारे। मांगलिक श्रवण करने के लिये देश विदेश से हजारों भक्तों का आगमन हुआ।
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. ने सभा का संचालन किया। उन्होंने पूज्यश्री के गुणों का वर्णन करते हुए अपनी अभिनंदनाऐं प्रस्तुत की। उन्होंने कहा- आचार्य भगवंत को शासन सेवा व प्रभावना के लिये विशेष साधना करनी होती है। गुरु का सानिध्य सभी को समान रूप से वैसे ही प्राप्त होता है, जैसे हर फूल को महकने का अवसर प्राप्त होता है।
पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. ने कहा- मुझे गुरुदेव की सेवा का अवसर जो प्राप्त हो रहा है, यह परम सौभाग्य की बात है। आगे भी मुझे आपकी सेवा मिलती रहे, यही प्रार्थना करता हूँ। पूज्य मुनि श्री महितप्रभसागरजी म. ने मराठी भाषा में वक्तव्य देते हुए कहा- मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हुआ। जैसे आग में तप कर सोना कुन्दन बनता है, वैसे ही गुरुदेव भी तप-जप की साधना में निखरते हैं। पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म. ने सूरि मंत्र साधना हेतु पूज्यश्री को वर्धापना अर्पण की। उन्होंने कहा- गुरुदेव जैसे शास्त्रें में पारगामी हैं, वैसे ही भक्ति भावों में भी उतने ही प्रवीण हैं। आपश्री के गुणों का क्या वर्णन करूँ, आपका हम अभिनंदन करते हैं।
इस अवसर पर संघवी विजयराजजी डोसी बैंगलोर, दिलीपजी गांधी जलगांव, रमेशजी बोथरा चेन्नई, सुश्री नेहा नाहर धूलिया, पदमजी बरडिया दुर्ग, जगद्गुरु मंडल धूलिया, सुरेश लूणिया, श्रुति कांकरिया, कीर्ति गोलेच्छा, भाग्येशकुमार आदि ने अपने भाव अभिव्यक्त किये। धूलिया संघ के अध्यक्ष श्री प्रेमचंदजी नाहर ने सभी का स्वागत किया एवं पूज्यश्री की साधना के प्रति अहोभाव अभिव्यक्त किया।
मुंबई बाडमेर निवासी श्री भंवरलालजी विरधीचंदजी छाजेड ने गुरुपूजन का लाभ प्राप्त किया। पूज्यश्री ने महामांगलिक के पश्चात् सूरिमंत्र साधना का विवेचन किया।
महामांगलिक के अवसर पर जलगांव, कारोला, सांचोर, चितलवाना, मुंबई, सूरत, नवसारी, नंदुरबार, दोंडाइचा, शहादा, खेतिया, तलोदा, अक्कलकुआं, खापर, सेलंबा, अमलनेर, धरणगांव, चोपडा, इन्दौर, उज्जैन, मालेगांव, नाशिक, बाडमेर, चोहटन, जैसलमेर, चेन्नई, बैंगलोर, अहमदाबाद, बडौदा, दुर्ग, रायपुर, धमतरी, भिवंडी, पाली, बालोतरा, हैदराबाद, ब्यावर, जयपुर, खिमेल, बिजयनगर, जसोल, बडवाह आदि कई शहरों से संघ व श्रद्धालु लोगों का बडी संख्या में पधारना हुआ।
बालोतरा से पधारे सुप्रसिद्ध संगीतकार अनिल सालेचा ने वातावरण को भक्ति मय बना दिया।
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