जैसलमेर में चातुर्मास का उल्लास
2019-09-03
स्वर्णनगरी जैसलमेर तीर्थ की धरा पर पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती एवं शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मयंकप्रभसागरजी म. एवं पूज्य आर्य मेहुलप्रभसागरजी म. की निश्रा में श्री जैसलमेर लौद्रवपुर पार्श्वनाथ जैन श्वे. ट्रस्ट एवं सकल श्रीसंघ जैसलमेर के तत्त्वावधान में चातुर्मास का माहौल शानदार रूप से बना हुआ है। विगत तीस वर्षों में खरतरगच्छीय मुनि भगवंतों का प्रथम बार यह चातुर्मास होने से पूरा जैन समाज आराधनामय है।
अक्षयनिधि तप, समोशरण तप, कषाय जय तप, अट्ठम, अट्ठाई के तपस्वियों का पच्चक्खान व पारणा शातापूर्वक हुआ। श्री रिषभ चोरडिया, सौ. रूपल पवन कोठारी, सौ. आरती भोजक ने अट्ठाई तपस्या कर श्रीसंघ का मान बढाया। संघ की तरफ से सभी तपस्वियों का अभिनंदन किया गया।
पर्युषण महापर्व में प्रतिदिन दुर्ग स्थित जिनालयों में सेवा-पूजा करने वालों का तांता, जैन भवन में प्रातःप्रवचन की धारा, प्रतिदिन परमात्मा की आंगी, सामूहिक आरती, चैत्यपरिपाटी आदि विविध आयोजनों में सभी श्रावक-श्राविकाओं ने प्रभुभक्त के साथ धर्मप्रेमी का नाम सार्थक किया।
संवत्सरी महापर्व के दिन प्रातः 8 बजे मूल कल्पसूत्र वाचन किया गया। तत्पश्चात साढे 10 बजे जैन भवन से दुर्ग जिनालयों की चैत्यपरिपाटी एवं स्नात्र महोत्सव, देववंदन आदि आयोजन किए गए।
पूज्य मुनि भगवंतों की निश्रा में चातुर्मास में आराधनामय विभिन्न आयोजन एवं साथ ही खरतरगच्छीय आचार्य श्री जिनभद्रसूरि ज्ञानभण्डार में संरक्षित प्राचीन पुस्तकों का सूचीकरण का विशद कार्य भी संपन्न हो रहा है। जिसका सकल जैन समाज जैसलमेर में आनंद का वातावरण है।
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