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राष्ट्रसंत आचार्य जिनकान्तिसागरसूरि की 28वीं पुण्यतिथि मनाई गई

By JAHAJMANDIR
राष्ट्रसंत आचार्य जिनकान्तिसागरसूरि की 28वीं पुण्यतिथि मनाई गई

पालीताना, 25 नवम्बर

आज पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. की 28वीं पुण्यतिथि हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।



इस अवसर पर प्रवचन देते हुए पूज्यश्री ने कहा- पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री एक जैन संत होते हुए जन संत थे। 10 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करके उन्होंने न केवल जैन आगमों का अभ्यास किया था, अपितु वे सर्वध्ार्म समन्वय वादी होने के कारण उन्होंने रामायण, महाभारत, पुराण, कुरान शरीफ एवं बाइबिल शरीफ का भी अभ्यास किया था।
उन्होंने कहा- वे आध्यात्मिक संत होने के साथ साथ सामाजिक व राष्ट्रीय संत थे। वे स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पहले ऐसे जैन संत थे, जिन्होंने भारत की आजादी की लडाई में अपने प्रवचनों द्वारा जन जागृति का शंखनाद किया था।
उन्होंने कहा- भारत और चीन की लडाई के समय पूज्यश्री ने सैनिकों के सहयोग हेतु उस समय के राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री मोहनलालजी सुखाडिया के समक्ष प्रेरणा देकर लाखों रूपयों का अर्थ सहयोग करवाया था।
उन्होंने कहा- पूज्यश्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ परम्परा के संत थे, परन्तु उन्होंने सदा सदा नैतिकता और सामाजिक चेतना का प्रचार प्रसार किया। उन्हीं की पावन स्मृति में उन्हीं के समािध्ा स्थल राजस्थान के मांडवला गाँव में पहला जहाज मंदिर निर्मित हुआ। जहाँ आज भी लाखों व्यक्ति दर्शन करके अपने जीवन को ध्ान्य बनाते हैं।
आज उनकी 28वीं पुण्यतिथि का पावन पर्व है। इस अवसर पर कस्तुर ध्ााम में नवाणुं यात्रा आयोजक श्री सुखीदेवी भीमराजजी छाजेड परिवार की ओर से दादा गुरुदेव की पूजा पढाई गई। तथा श्री जिन हरि विहार में गुरु पद पूजा का आयोजन किया गया।

प्रेषक

महावीर छाजेड


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