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By JAHAJMANDIR


जटाशंकर 

-उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म. सा.

जटाशंकर दौड़ दौड़ कर पूरे गांव में मिठाई वितरण कर रहा था। गांव वालों ने उससे पूछा भाई क्या बात है 
पुत्र हुआ है।
जटाशंकर ने कहा नहीं!
फिर किस बात के लिये मिठाई बांट रहे हो!
अरेमत पूछो यह बातमैं आज कितना अपने आपको प्रफुल्लित महसूस कर रहा हूं।
आखिर गांव के 25-30 व्यक्ति एक साथ इकट्ठे होकर उससे पूछने लगे भैयाकारण तो तुम्हें बताना ही होगा।
जटाशंकर ने कहा-अरेऔर कुछ नहीं मेरा गधा खो गया हैंइस उपलक्ष्य में मिठाई वितरण कर रहा हूँ।
लोग हैरान होकर कहने लगे भैयायह बात खुशी की है या शोक कीतुम परेशान होने की जगह राजी हो रहे हो।
जटाशंकर ने कहा राजी क्यों  होउँ। रोज मैं गधे पर सवार होकर निकलता था। यदि मैं उस पर  
सवार होता तो गधे के साथ साथ मैं भी नहीं खो जाता। मैं अपनी सुरक्षित उपस्थिति के लिये मिठाई बाँट रहा हूँ।
लोग उसके तर्क को सुनकर मुस्कुराने लगे।
सही दिशा के अभाव में तर्क तथ्य का बोध नहीं करा पाता।
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