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नाशिक आडगांव स्थित कान्ति मणि नगर में मूलनायक परमात्मा की दिव्य प्रतिमा
वे परमात्मा की भक्ति में बहुत रस लेते हैं। उन्होंने अनुभव किया कि परमात्मा की भक्ति का यह अनूठा अवसर मिला है। उन्होंने अपने संपर्कों से पाषाण मंगवाने की पूरी तैयारी कर ली। फरवरी में आर्डर दिया गया था। अप्रेल महिना पूरा होने का था। पर पाषाण भारत नहीं आ पाया था। कुछ समस्याऐं थी। कानूनी अडचनें थी। हमने प्रार्थना की, परमात्मन् आपको ही बिराजमान करना है... आपको ही बिराजमान होना है। आपको पध्ाारना ही होगा। और मई महिने के तीसरे सप्ताह में समाचार मिला कि पाषाण मुंबई आ गया है। उसके बाद मेहनत की चितलवाना निवासी श्री पारसमलजी मुथा ने!
परमात्मा का चमत्कार और उत्तमचंदजी व पारसमलजी का पुरूषार्थ! जून महिने की 4 तारीख को पाषाण जयपुर पहुँच गया। दिव्य दर्शन आर्ट के शिल्पकार कैलाशजी शर्मा ने मात्र चार दिन लिये! और चार दिनों में परमात्मा की दिव्य प्रतिमा का घडन कर लिया। वह शिल्पकार मूर्तिकार भी नहीं समझ पाया कि अमूमन महिने भर में तैयार होने वाली प्रतिमा चार दिनों में कैसे बन गई! यह महिमा परमात्मा की... दादा गुरुदेव की! और उस प्रतिमा का मंगल प्रवेश अन्य सभी प्रतिमाओं के साथ 11 जून 2014 को हो गया।
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