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मुंबई में तपश्चर्या का कीर्तिमान
परम पूज्य गुरूदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य देव श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरूदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा.,
पूज्य मुनि श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री मनीषप्रभसागरजी म.
पू. मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. पू. मुनि
श्री मेहुलप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी म. ठाणा 7 एवं
पूजनीया प्रखर व्याख्यात्री साध्वी श्री हेमप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या
पू. साध्वी श्री श्रद्धांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री दीपमालाश्रीजी म.
पू. साध्वी श्री कल्याणमालाश्रीजी म. ठाणा 3 की पावन निश्रा में मुंबई
महानगर में तपस्या का बहुत ही अनूठा वातावरण निर्मित हुआ है।
उनका पारणा भाद्रपद शुक्ल पंचमी बुधवार ता. 22 अगस्त 2012 को अत्यन्त आनन्द व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पारणे का लाभ श्री धर्माजी भलाजी बोथरा, सांचोर वालों ने लिया।
ता. 23 अगस्त को तपस्वियों का भव्य वरघोडा आयोजित हुआ। वरघोडे में जो सजावट
की गई थी, वह बहुत ही अद्भुत थी। कृत्रिम देवविमान द्वारा पुष्पवृष्टि व
थर्मोकोल से बने ऐरावत हाथी इस शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण थे। सजी हुई
बग्घियों में मासक्षमण व सिद्धि तप के तपस्वियों को बिराजमान किया गया था।
शोभायात्रा के पश्चात् माधोबाग वाडी के विशाल पाण्डाल में अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जीतो के चेयरमेन व सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री नरेन्द्रजी बलदोटा, जीतो के अध्यक्ष श्री मोतीलालजी ओसवाल, उच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायाधीश श्री राजेन्द्रजी कोचर, जीतो के महामंत्री श्री राकेशजी मेहता, भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष श्री सुमतिलालजी कर्णावट, सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री प्रदीपजी राठोड का पदार्पण हुआ।
इस अवसर पर पूज्यश्री ने तपस्या की महिमा का वर्णन करते हुए जैन संघ की एकता व पारस्परिक सौहार्द्रभाव की व्याख्या की। उन्होंने कहा- हमें प्रयास करना चाहिये कि सकल जैन संघ में एकता का वातावरण बने और संवत्सरी, महावीर जन्म कल्याणक आदि विशिष्ट पर्व सामूहिक रूप से एक साथ एक ही दिन मनाये जाये। पर जब तक एकता न हो, तब तक हमें अपनी अपनी परम्पराओं का पालन करते हुए दूसरी परम्पराओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिये।
पूज्य तपस्वी मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी म. एवं तपस्वी साध्वी श्री कल्याणमालाश्रीजी म. का गुरू पूजन किया गया।
सभी अतिथियों का परिचय श्री प्रकाशजी कानूगो ने दिया। उनका भावभरा बहुमान किया गया।
पूज्य महातपस्वी मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी म. ने 35 उपवास का महान् तप किया। पूजनीया साध्वी श्री कल्याणमालाश्रीजी म. ने सिद्धि तप की तपस्या की।
उनका पारणा भाद्रपद शुक्ल पंचमी बुधवार ता. 22 अगस्त 2012 को अत्यन्त आनन्द व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पारणे का लाभ श्री धर्माजी भलाजी बोथरा, सांचोर वालों ने लिया।
शोभायात्रा के पश्चात् माधोबाग वाडी के विशाल पाण्डाल में अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जीतो के चेयरमेन व सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री नरेन्द्रजी बलदोटा, जीतो के अध्यक्ष श्री मोतीलालजी ओसवाल, उच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायाधीश श्री राजेन्द्रजी कोचर, जीतो के महामंत्री श्री राकेशजी मेहता, भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष श्री सुमतिलालजी कर्णावट, सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री प्रदीपजी राठोड का पदार्पण हुआ।
इस अवसर पर पूज्यश्री ने तपस्या की महिमा का वर्णन करते हुए जैन संघ की एकता व पारस्परिक सौहार्द्रभाव की व्याख्या की। उन्होंने कहा- हमें प्रयास करना चाहिये कि सकल जैन संघ में एकता का वातावरण बने और संवत्सरी, महावीर जन्म कल्याणक आदि विशिष्ट पर्व सामूहिक रूप से एक साथ एक ही दिन मनाये जाये। पर जब तक एकता न हो, तब तक हमें अपनी अपनी परम्पराओं का पालन करते हुए दूसरी परम्पराओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिये।
पूज्य तपस्वी मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी म. एवं तपस्वी साध्वी श्री कल्याणमालाश्रीजी म. का गुरू पूजन किया गया।
सभी अतिथियों का परिचय श्री प्रकाशजी कानूगो ने दिया। उनका भावभरा बहुमान किया गया।